तुम गीता, तुम कुरान भूल जाओगे
धर्म की आड़ में झूठ और मक्कारी से भरी राजनीति और मंचो से नफरतों का भयानक तूफ़ान यही आज का सच है शायद, लेकिन एक हकीकत ये भी है परीक्षा कोई भी हो परिणाम दो ही हो सकते हैं सकारात्मक या नकारात्मक और कोई भी परीक्षार्थी यदि एक ही परिणाम का आदि हो जाये और अचानक उसका परिणाम उसकी अपेक्षाओ से भिन्न हो तो उसके पर उसका खुद बोझ नहीं उठा पाते और पैरों तले जमीन का अहसास उसे जल्द ही होने लगता है। माफ़ कीजियेगा...!