हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सब एक हैं इंसान से बढ कर कोई जात नहीं
Jun 10, 2014
बीता खुशियों का आसमां कि फिर दुःख की गहराईयों में डूबना पड़ा
Jun 9, 2014
मैं रोज रूठ जाता, गर वो मुझे मनाने आती
इतना लिपट कर रोया माँ से, मेरे आसूँ मोती बन गए
अपने घर के उस आँगन को मैं छोड़ आया हूँ