अपने घर के उस आँगन को मैं छोड़ आया हूँमिलने की इच्छा है कि तभी इस मोड़ आया हूँजो रोक देते थे मुझे तेरी मोहब्बत की राहो मेंतू फ़िक्र ना कर वास्ते तेरे, वो रिश्ते तोड़ आया हूँ
अपने घर के उस आँगन को मैं छोड़ आया हूँ
Jun 9, 2014
•
2 min read
अपने घर के उस आँगन को मैं छोड़ आया हूँमिलने की इच्छा है कि तभी इस मोड़ आया हूँजो रोक देते थे मुझे तेरी मोहब्बत की राहो मेंतू फ़िक्र ना कर वास्ते तेरे, वो रिश्ते तोड़ आया हूँ