नारी बेटी है, बहन है, कहीं बहू, तो कहीं माँ का रूप लेती है
Jul 10, 2014
हमने अमीरों के घर को गरीबो के खून से चिनते देखा है
Jul 8, 2014
जुल्फों पे घनी, मैं नादान दीवाना हुआ
Jul 6, 2014
हंसने हंसाने का काम बहुत हुआ , अब रहा नहीं कोई बाकि
Jun 30, 2014
कुछ लोग बिना बताये , कुछ बताकर शरारत करते हैं
Jun 29, 2014