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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
नारी...

नारी...

नारी बेटी है, बहन है, कहीं बहू, तो कहीं माँ का रूप लेती है

Jul 10, 2014

गरीब तो बस यूँ ही बेवजह बदनाम है

गरीब तो बस यूँ ही बेवजह बदनाम है

हमने अमीरों के घर को गरीबो के खून से चिनते देखा है

Jul 8, 2014

नादान दीवाना...

नादान दीवाना...

जुल्फों पे घनी, मैं नादान दीवाना हुआ

Jul 6, 2014

वतन के वास्ते ...

वतन के वास्ते ...

हंसने हंसाने का काम बहुत हुआ , अब रहा नहीं कोई बाकि

Jun 30, 2014

अपने ही बगावत करते हैं

अपने ही बगावत करते हैं

कुछ लोग बिना बताये , कुछ बताकर शरारत करते हैं

Jun 29, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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