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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
गुरमीत सिंह ‘गुनी’ हूँ

गुरमीत सिंह ‘गुनी’ हूँ

मैं शब्दों को जोड़कर जाल नहीं रचना बुन देता हूँ

Jul 27, 2014

शहीद होते देखा है

शहीद होते देखा है

मैंने सीमा पर वीरो को रक्त बोते देखा है

Jul 25, 2014

सपने छोड़ दिए

सपने छोड़ दिए

सिंहासन पर बैठने के सपने देखने छोड़ दिए .....

Jul 25, 2014

मक्कारो की टोली

मक्कारो की टोली

गोली खाने की तमन्ना सीने पर न दिल से अब जाएगी

Jul 24, 2014

हूँ तो तेरे जैसा ही

हूँ तो तेरे जैसा ही

दृढ किया हो निश्चय, फिर राह में कोई अडा नहीं है

Jul 24, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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