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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
दरोगा जी — अंक – 2

दरोगा जी — अंक – 2

पिछले अंक में दरोगा जी थाने में चले गए थे और दरोगा जी की बीबी अभी भी बच्चे से बाते कर रही थी इसे समझ आ गया था कि बच्चा बहुत सच्चा है और हम सब एक हैं अब आगे...

Aug 10, 2014

#गैर और #अपने

#गैर और #अपने

मैंने #गैरो पर गुस्सा करना छोड़ दिया है, और #अपना कोई है नहीं दुनिया में ...!

Aug 9, 2014

#ख़ुशी ...

#ख़ुशी ...

मुझे उनसे बाते करके #ख़ुशी मिलती है, और आजकल मुझे बस खुशियाँ ही चाहिए...!

Aug 9, 2014

जीवन की सबसे बड़ी भूल

जीवन की सबसे बड़ी भूल

जीवन की सबसे बड़ी भूल केवल और केवल ये है कि.....आप ये सोच लें “कोई आपका अपना है” फिर चाहे वो निर्जीव हो या सजीव कुछ भी आपका अपना नहीं है ध्यान रखें कोई अगर कहे ,

Aug 9, 2014

क्या है मेरा

क्या है मेरा

कभी कभी जीवन में कुछ ऐसा मिल जाता है जिसके लायक आप नहीं या वो आपके लायक नहीं इन चीजो को जितनी जल्दी पहचान लो उतना अच्छा होता है वरना बाद में पछताना पड़ता है केवल पछताना ...... ख़ुशी होती है जब ऐसी ही कुछ चीज़े मेरे जीवन में आती हैं और चली जाती हैं

Aug 9, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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