हर बार की तरह इस बार भी दरोगा जी अपने घर पर अपनी बीबी की डांट फटकार खाकर सब्जी खरीदने के लिए बाजार जा रहे थे मन ही मन बडबडा रहे थे कि सुबह होती है और ये मुझे सुनाने लगती है। उधर दरोगा जी की बीबी भी कुछ कम नहीं है वो भी घर में जोर जोर से चिल्ला कर दरोगा जी को गालियाँ देने में कमी नहीं छोड़ रही। इतने में एक आदमी बहार दौड़ता हुआ एक हिंदी समाचार पत्र बेचता हुआ जाता है।