इस चिंगारी से कुछ ना होगा फिर एक बार मसाल जलानी होगी
Oct 18, 2014
काश मेरे ये लब्ज तेरे होठो से निकले मधुर अल्फाज हो
Oct 17, 2014
तुमने जिस राह से गुजरना छोड़ दिया मैं उसी राह पर निकला हूँ इसलिए नहीं कि मुझे शौक है अकेले चलने का बल्कि इसलिए मेरी तमन्ना है तुम्हारे कदमो से कदम मिलाने की...
Oct 15, 2014
गौरवान्वित हो शहीद साहसी पुरुष आज ऐसा कोई काम होना चाहिए
पता नहीं इश्क है या हमदर्दी हमसे कि सपने में भी चली आई अपना बनाने