आज यकीं हो चला है तुम आई और चली गई ये क्रम अच्छा है
Oct 15, 2014
बड़े निक्कमे हैं वो लोग जो इस मुक्तक पर खरे उतरते हैं
Oct 11, 2014
एक सुबह उठकर बोला माँ कपडे दो सीमा पर मुझको जाना है
ख़ास के लिए