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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
Sunday May 03, 2015

Sunday May 03, 2015

यहाँ इंसानो को इंसानो से बात करना नहीं आता और गुनी तूने,....तस्वीरो की जुबाँ सीखनी चाही

May 3, 2015

कोई नवातार लिखो

कोई नवातार लिखो

जागो ऐ युवाओ, अब तुम शेरो की ललकार लिखो

May 3, 2015

याद आएगी मेरी बात

याद आएगी मेरी बात

तुम ख़ास हो हम हैं ख़ाक कहाँ मुमकिन है मुलाकात

May 3, 2015

Sunday May 03, 2015

Sunday May 03, 2015

गुनी अपने पैरो की छाप न छोड़ा करो लोग इन्हें मसल कर चले जाते हैं .....#गुनी

May 3, 2015

कई जनो को ढूंढता रहा

कई जनो को ढूंढता रहा

गलती थी मेरी जो मैं अजनबी चेहरों में अपनों को ढूंढता रहा

May 3, 2015

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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