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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
गाज लिखेंगे

गाज लिखेंगे

नयी जगह नया सवेरा नए सवेरे में दिल के सारे राज लिखेंगे

May 3, 2015

तेरी अदाएं इन्हें आती हैं

तेरी अदाएं इन्हें आती हैं

ये मौसम, ये हवाएँ, ये फिजायें भी अकसर तेरी याद दिलाती है

May 3, 2015

ख़त

ख़त

जिंदगी के इस विद्यालय में एक सुनहरा अक्षर भी होता तो कोरे कागज पर पूरा ख़त लिख देता मैं

May 3, 2015

सपने में गजब की बात हो गयी

सपने में गजब की बात हो गयी

सपने में गजब की बात हो गयी

Mar 26, 2015

अपनो को ढूंढता रहा

अपनो को ढूंढता रहा

गलती थी मेरी जो मैं अजनबी चेहरों में अपनों को ढूंढता रहा

Mar 6, 2015

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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