गलती थी मेरी जो मैं अजनबी चेहरों में अपनों को ढूंढता रहाअँधेरी काली रात थी, जिसमे में सुनहरे सपनो को ढूंढता रहाविश्वास करो मेरा वक़्त नहीं लगता रिश्ते टूटने में, बिखरने में एक ही बहुत है दिल तोड़ने को , मैं कई जनो को ढूंढता रहा
#गुनी…
गलती थी मेरी जो मैं अजनबी चेहरों में अपनों को ढूंढता रहा
Mar 5, 2015
•
2 min read
गलती थी मेरी जो मैं अजनबी चेहरों में अपनों को ढूंढता रहाअँधेरी काली रात थी, जिसमे में सुनहरे सपनो को ढूंढता रहाविश्वास करो मेरा वक़्त नहीं लगता रिश्ते टूटने में, बिखरने में एक ही बहुत है दिल तोड़ने को , मैं कई जनो को ढूंढता रहा
#गुनी…