तुम ख़ास हो हम हैं ख़ाक कहाँ मुमकिन है मुलाकातफिर भी चाहत के भरोसे रोशन होती है, मेरी हर रातचाहे कितनी भी कोशिश करलो , भूलने – भुलाने कीजब पुराने पन्नों को पलटोगी, याद आएगी मेरी बात
#गुनी…
तुम ख़ास हो हम हैं ख़ाक कहाँ मुमकिन है मुलाकात
May 3, 2015
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तुम ख़ास हो हम हैं ख़ाक कहाँ मुमकिन है मुलाकातफिर भी चाहत के भरोसे रोशन होती है, मेरी हर रातचाहे कितनी भी कोशिश करलो , भूलने – भुलाने कीजब पुराने पन्नों को पलटोगी, याद आएगी मेरी बात
#गुनी…