हम महफ़िल में बैठकर उनकी तस्वीर देखा करते हैंरोज साँझ सवरे उन्हें अनजान राहो में ताका करते हैं हम तो आशिक मिजाज़ हैं, दीवाना है अंदाजगुस्से को भी उनके जाम-ए-शबाब समझ कर पिया करते हैं
हम महफ़िल में बैठकर उनकी तस्वीर देखा करते हैं
Oct 19, 2013
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हम महफ़िल में बैठकर उनकी तस्वीर देखा करते हैंरोज साँझ सवरे उन्हें अनजान राहो में ताका करते हैं हम तो आशिक मिजाज़ हैं, दीवाना है अंदाजगुस्से को भी उनके जाम-ए-शबाब समझ कर पिया करते हैं