किसी ने खाई हैं कसमे मुहब्बत की कोई अंत की बात करता हैये पडोसी साथ की बात करता हैं कहीं पीठ पीछे घात करता हैसाथी मुल्क होता कोई और तो मिटा देता निशान इस जहान सेये तो हिंदुस्तान हैं जो दुश्मनों से भी प्रेम की मुलाकात करता है
किसी ने खाई हैं कसमे मुहब्बत की कोई अंत की बात करता है
Sep 29, 2014
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किसी ने खाई हैं कसमे मुहब्बत की कोई अंत की बात करता हैये पडोसी साथ की बात करता हैं कहीं पीठ पीछे घात करता हैसाथी मुल्क होता कोई और तो मिटा देता निशान इस जहान सेये तो हिंदुस्तान हैं जो दुश्मनों से भी प्रेम की मुलाकात करता है