ऐसी अजीब थी राहें कि जिधर चला टूटता ही गया दिललाख कोशिशें की फिर भी हासिल न हुई अपनी मंजिलकिसी ने खूब कहा कि, “जिह्वा में इतनी मिठास ले आ”मौहब्बत भी लौट आए वापिस तू खुद को बना काबिल
#गुनी …
ऐसी अजीब थी राहें कि जिधर चला टूटता ही गया दिल
Sep 6, 2014
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ऐसी अजीब थी राहें कि जिधर चला टूटता ही गया दिललाख कोशिशें की फिर भी हासिल न हुई अपनी मंजिलकिसी ने खूब कहा कि, “जिह्वा में इतनी मिठास ले आ”मौहब्बत भी लौट आए वापिस तू खुद को बना काबिल
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