दोस्ती ही थी वो, या बस तुमने भी मखोल उड़ाया थाकिसी के दिए जख्मो को कुरेद कर नासूर बनाया थाआज और अब , सच बताना हमें , तुम जरा सोचकरगुस्ताखी की थी, जो हमने दोस्ती का हाथ बढाया था
#गुनी …
दोस्ती ही थी वो, या बस तुमने भी मखोल उड़ाया था
Sep 15, 2014
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दोस्ती ही थी वो, या बस तुमने भी मखोल उड़ाया थाकिसी के दिए जख्मो को कुरेद कर नासूर बनाया थाआज और अब , सच बताना हमें , तुम जरा सोचकरगुस्ताखी की थी, जो हमने दोस्ती का हाथ बढाया था
#गुनी …