क्या ढूँढने निकला हूँ मैं नहीं जानता

इस महकती खुशबू को मैं नहीं पहचानता

मैं कल भी अकेला था आज भी अकेला हूँ

कोइ किसी का है इस दुनिया में मैं नहीं मानता

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