Logo
Search
Login
Sign Up
Logo

Archive

Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
गुलाब-ए-गुलिस्तां

गुलाब-ए-गुलिस्तां

मेरी आँखे भी बंद होती है तो तेरा चेहरा नजर आता है

Dec 8, 2013

मैंने “उन्हें” चुना हैं

मैंने “उन्हें” चुना हैं

मोहब्बत की उलझनों से मैंने तक़दीर को बुना है

Dec 8, 2013

खूनदान महादान जीवनदान

खूनदान महादान जीवनदान

उड़ते परिंदे सी तू ऊँची उड़ान तो भर

Dec 8, 2013

जहन्नुम से अपनी जगह चुरा रहे हो

जहन्नुम से अपनी जगह चुरा रहे हो

बनावट के खिलोनो से क्या तुम कुदरत को सजा रहे हो

Dec 8, 2013

मेरे हाथ ख़त भी नहीं

मेरे हाथ ख़त भी नहीं

मेरे हाथ ख़त भी नहीं उन तक पैगाम पहुँचाने को मेरे साथ वो भी नहीं कुछ वक़्त बिताने को मैं तड़प रहा शिशिक रहा हूँ यादो में उनकी मेरे पास कोई राह नहीं वापस लौट जाने को

Oct 20, 2013

Load more

गुरमीत सिंह "गुनी"

© 2026 गुरमीत सिंह "गुनी".
beehiivPowered by beehiiv