मेरी आँखे भी बंद होती है तो तेरा चेहरा नजर आता है
Dec 8, 2013
मोहब्बत की उलझनों से मैंने तक़दीर को बुना है
उड़ते परिंदे सी तू ऊँची उड़ान तो भर
बनावट के खिलोनो से क्या तुम कुदरत को सजा रहे हो
मेरे हाथ ख़त भी नहीं उन तक पैगाम पहुँचाने को मेरे साथ वो भी नहीं कुछ वक़्त बिताने को मैं तड़प रहा शिशिक रहा हूँ यादो में उनकी मेरे पास कोई राह नहीं वापस लौट जाने को
Oct 20, 2013