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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
छा गया

छा गया

ये ठोकरों की महरबानी है जो मुझे चलना आ गया

Sep 10, 2014

नौजवान बेरोजगार है

नौजवान बेरोजगार है

आत्मविश्वास के बिना जीवन में हर बात अधूरी है

Sep 7, 2014

परी हो

परी हो

तुम भी तो एक परी हो और परियो को मैंने बस दादी की कहानियो में सुना और सपनो में देखा है !...

Sep 7, 2014

छवि दिखाई देगी

छवि दिखाई देगी

अपनी जिन्दगी के पीले पन्ने पलटकर देख मेरी छवि दिखाई देगी

Sep 6, 2014

खुद को बना काबिल

खुद को बना काबिल

ऐसी अजीब थी राहें कि जिधर चला टूटता ही गया दिल

Sep 6, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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