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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
हो रहा बबाल है

हो रहा बबाल है

देश में, देश में, धर्म के नाम पर हो रहा बबाल है

Sep 23, 2014

तोड़कर बस्तियां

तोड़कर बस्तियां

लोग तो लगे पड़े हैं तोड़कर बस्तियाँ महलो को सजाने में

Sep 21, 2014

जरुरत नहीं गांधीवाद की

जरुरत नहीं गांधीवाद की

जिधर देखता हूँ देश में लड़ाई ही लड़ाई है लेकिन जातिवाद की

Sep 21, 2014

इन्सान बनकर

इन्सान बनकर

कोई आता है अनजान बनकर , वाह क्या बात हैं

Sep 20, 2014

सेना का सिपाही हूँ

सेना का सिपाही हूँ

कभी अपने घर की खिड़की खोलकर देखा है

Sep 20, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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