Logo
Search
Login
Sign Up
Logo

Archive

Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
बचपन नादान दो

बचपन नादान दो

मेरा तो बचपन ही अच्छा था जब न धर्म था न जात थी जब देखा खेलने निकल पड़े अपने दोस्तों के साथ न कोई चिंता न कोई गम बस दोस्त दोस्त है न गरीब है वो न अमीर है वो आज लगता है कि तब जितने लोग गरीब हैं उनके लिए जरुर कुछ करना चाहता था मैं और आज ....क्या हाल है पूछना भी ध्यान नहीं रहता?

Sep 25, 2014

पिछड़ा ज़माना कहेंगे

पिछड़ा ज़माना कहेंगे

मैं नहीं करता किसी से मौहब्बत, वरना मुझे दीवाना कहेंगे लोग

Sep 25, 2014

चाय बनाने वाला आया है

चाय बनाने वाला आया है

मैं किसी भी राजनैतिक पार्टी के पक्ष में कभी नहीं था न हूँ मतलब मैं बिना कारण प्रचार के पक्ष में नहीं हूँ

Sep 25, 2014

तुम बताना छोडो

तुम बताना छोडो

विरोधी दुनिया में हर किसी पर हक़ जताना छोडो

Sep 24, 2014

देखने चेहरें बहुत हैं

देखने चेहरें बहुत हैं

मत न कर फ़िक्र किसी बात की, तेरी जिन्दगी में लहरें बहुत हैं

Sep 23, 2014

Load more

गुरमीत सिंह "गुनी"

© 2026 गुरमीत सिंह "गुनी".
beehiivPowered by beehiiv