साहस के उठे कदम बगावत की खिलाफत में, सलाखे जंजीर हो जाए
Sep 28, 2014
मित्रो मौहब्बत में धोखा खाने वालो की कमी नहीं है जग में धोखा खाया हो न खाया हो किसी ने चाहे और अनचाहे किसी से उम्मीद रख लेते हैं हम और आप इसी पर एक पंक्ति से मुक्तक की कोशिश है मेरी...
यूँ ही लिखते लिखते कविता लिख दी , कभी कविताओ में अहसास लिख डाला
Sep 27, 2014
तेरे इन पुराने शतरंज के पैतरो से ना सह होगी ना मात होगी
Sep 26, 2014
देखकर तीर्थ बद्री , काशी और हरिद्वार यहाँ पूजा को मन कर आया