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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
जुबाँ जहरीली हो जाती है

जुबाँ जहरीली हो जाती है

आज से मेरे काबिल दोस्त सोच समझकर कर पियें

Dec 24, 2014

हिंदुस्तान बना दूंगा

हिंदुस्तान बना दूंगा

लिख लेख नया , मैं भारत की पहचान बना दूंगा

Dec 24, 2014

भगवान बदल जाते हैं

भगवान बदल जाते हैं

दो दो रूपए के चलते लोगो के ईमान बदल जाते हैं

Dec 24, 2014

अच्छा तू बचपन में मर जाता

अच्छा तू बचपन में मर जाता

शुभ प्रभात (क्षमा सहित मुक्तक)

Nov 1, 2014

ऐ चाँद अभी भौर है

ऐ चाँद अभी भौर है

वो निकली है यहीं कहीं से अभी अभी सुना शौर है

Oct 30, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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