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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
मुझे सिर्फ इतना फ़िक्र है

मुझे सिर्फ इतना फ़िक्र है

तू फिर आएगी दिल तोड़कर, अपना बनाने बस्ती में ये जिक्र है

Oct 30, 2014

आँखों में पानी देता है

आँखों में पानी देता है

वक़्त से खबरदार ये वक़्त चोट-गहरी निशानी देता है

Oct 30, 2014

भारत माँ के गुलाम बन जाना

भारत माँ के गुलाम बन जाना

राजनीती का शौक चढ़ जाए कभी तो अब्दुल कलाम बन जाना

Oct 30, 2014

नयी कहानी हो गई

नयी कहानी हो गई

वो मिलने आती थी चांदनी रातो को वैसे ये बात पुरानी हो गई

Oct 30, 2014

धड़कन भी तेरी है

धड़कन भी तेरी है

क्या शक्ल, क्या सूरत, दिल की खूबसूरती जरुरी है

Oct 30, 2014

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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