तू फिर आएगी दिल तोड़कर, अपना बनाने बस्ती में ये जिक्र है
Oct 30, 2014
वक़्त से खबरदार ये वक़्त चोट-गहरी निशानी देता है
राजनीती का शौक चढ़ जाए कभी तो अब्दुल कलाम बन जाना
वो मिलने आती थी चांदनी रातो को वैसे ये बात पुरानी हो गई
क्या शक्ल, क्या सूरत, दिल की खूबसूरती जरुरी है