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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
माटी माटी है गई

माटी माटी है गई

खूब बनाये अपने, अपने छोड़ दिए साथ रे

Jan 7, 2015

खुश हूँ मगर फिर वही डर

खुश हूँ मगर फिर वही डर

अब किसी प्याले का नशा नहीं होता, ऐ साकी तूने जाम इतने पिला दिए

Jan 7, 2015

निगाहो में जा छलके

निगाहो में जा छलके

मैं अश्को को उनसे छिपाता रहा, मगर कम्बख्त बेवफा निकले

Jan 7, 2015

माँ से बात किये हुए

माँ से बात किये हुए

नमस्कार मित्रो

Jan 6, 2015

मुझे बांध रखा है आज भी तेरे मासूम इशारो ने

मुझे बांध रखा है आज भी तेरे मासूम इशारो ने

नमस्कार मित्रो

Jan 1, 2015

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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