हमरा तो सर ही चकरा गवा है...
Author: Gurmeet Singh
शायद मंद हवा थी
सिर्फ तुम...हां तुम...ओह हो...
हिन्दुस्तान लिखता हूँ
सोचिये कुछ इस तरह...
खफा है मेरी परछाई से
कोशिश छोटी सी...क्या फर्क...
मूरख रहते मौन : दोहा
कोशिश देखेंशहीदों सा...
खुश रहो अपने संसार मे
आज फिर एक बार तुम्हारे...
परिंदा नहीं आया
छोटी सी कोशिश गौर...
जीवन मे फैसले सोच समझकर लें
कुछ ही समय पहले की बात है...
तेरे आने का इंतजार करता हूँ
सिर्फ तुम्हारे लिए आज...
ना यूँ कि मैं घर मे एकलौता हूँ
शुभ प्रभात ...एक हाथ है जो...