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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
जब शेर सा हिन्दुस्तान बोलता है

जब शेर सा हिन्दुस्तान बोलता है

अच्छे बुरे की पहचान कपड़ो से नहीं होती , बन्दे का ईमान बोलता है

Jun 23, 2015

गरीब मजबूरी में रोता है

गरीब मजबूरी में रोता है

लहरें खुद रास्ता बनाती हैं, उन्हें कस्तीयाँ नहीं बोलती

Jun 22, 2015

Monday June 22, 2015

Monday June 22, 2015

मैं हैरत में हूँ इस बात की कि रोज आईना देखकर भी खुद को कैसे नहीं पहचानते लोग

Jun 22, 2015

परछाई से दूर

परछाई से दूर

परछाई से दूर भागने पर , परछाई साथ नहीं छोड़ देती

Jun 22, 2015

#संदेश

#संदेश

मेरी किताब के सारे पन्नों को फाड़कर फेकने के बाद, उसने कहा, जरा आखिरी पृष्ठ की वो आखिरी दास्ताँ तो सुना दो...

Jun 22, 2015

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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