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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
सब एक गिने जाने लगे

सब एक गिने जाने लगे

जब पडौसी, अपने ही पडौसी को धमकाने लगे

Aug 7, 2015

बड़ा डर लगता है

बड़ा डर लगता है

लम्बी दूरियां तय करने की हसरत तो थी उसकी

Aug 7, 2015

खामखाँ नहीं...

खामखाँ नहीं...

एक अदना सी कोशिश हमारी भी...

Aug 3, 2015

फूल बनकर मुकर्रर हो

फूल बनकर मुकर्रर हो

ऐ हुसन तु नफरत के ही महज दो लव्ज कह तो दे

Jul 29, 2015

हिंदी कवि सम्मेलन :: गुनी

हिंदी कवि सम्मेलन :: गुनी

Jul 28, 2015

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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