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Dive into a collection of past posts and rediscover timeless content.
कैसी प्रीत हो गई हो

कैसी प्रीत हो गई हो

बेवक़्त आती हो , कैसी प्रीत हो गई हो

Jul 29, 2016

कयामत सा दौर है

कयामत सा दौर है

जख्म किस तरह से दिखाऊं खुद के

Jul 27, 2016

कश्तियाँ हैं, पतवारें नहीं है

कश्तियाँ हैं, पतवारें नहीं है

आसमां है मगर तारे नहीं है

Jul 26, 2016

तेरा मेरा मिलना कोई इत्तिफ़ाक नहीं था

तेरा मेरा मिलना कोई इत्तिफ़ाक नहीं था

तेरा मेरा मिलना कोई इत्तिफ़ाक नहीं था

Jul 25, 2016

ख्वाईश आसमां को छूने की है

ख्वाईश आसमां को छूने की है

बेशक हम आज भी अपनी हदो में हैं

Jul 24, 2016

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गुरमीत सिंह "गुनी"

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